बीमारी का इलाज
हर बीमारी का आसान इलाज
हम देखते आए हैं और हमारे साथ भी बीती है, कि यह बीमारी चाहे शारीरिक हो चाहे मानसिक, पर हर किसी व्यक्ति के शरीर में पाई जाती है। और हर कोई इंसान कोई न कोई बीमारी से पीड़ित रहता है। यह आज से नहीं जब से संसार की उत्पत्ति हुई है तब से ही लागू है, तो यह क्या भगवान का संविधान है? या हमारे कर्म है? अगर हम इस विषय पर गहरे चलते हैं तो पता लगता है कि यह हमारे पिछले पाप कर्म होते हैं जो हमें दुखदाई होते हैं।
हमारा मनुष्य जन्म होते हुए भी हम भगवान का नाम नहीं जपते और शराब के ठेके, तंबाकू सेवन व अनेक प्रकार की बुराइयों में जुड़े रहते हैं जिसका परिणाम हमें भुगतना पड़ता है। तो क्यों ना हम अभी से ही कर्म बनाने शुरू कर दें तो कितनी अच्छी बात है।
यजुर्वेद अ. 5 मन्त्र 32 में यह भी लिखा है की कबीर परमात्मा पाप कर्म काट सकते हैं जो व्यक्ति तत्वदर्शी संत से नाम लेकर भक्ति करता है तो क्यो ना उस भगवान की शरण मे ही जाए क्यो बुजुर्गों के अंधविश्वास में अड़े रहे? अगर उनके पीछे चले तो वो पूरी जिंदगी दुख पाए और हम भी उसी केटेगरी में आएंगे। तो हम पढ़ लिख कर भी अंधविश्वास में रहे तो हमारे जैसा नादान नही।
आपको बताते हैं कि एक पुस्तक है उसका नाम है जीने की राह। जिसको मैंने पढ़ी और जिन्होंने पढ़ी उनकी जीवन शैली में पूरा बदलाव आया। और आज काफी लोग इस पुस्तक को पढ़ रहे हैं और सुखी हो रहे है तो आप भी पुस्तक को जरूर पढ़ें और हर प्रकार के कष्ट से मुक्ति पाए।
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