संदेश

भगवान

            परमात्मा सशरीर प्रकट होते है जब भगवान अपने स्थान सतलोक से चलकर आते है तो कवियों की तरह आचरण करते हैं और अपने तत्वज्ञान को जगह-जगह प्रकट होकर फैलाते है। अपनी प्यारी आत्मो को मिलते हैं और जब वह परमात्मा पृथ्वी लोक पर आते है तो वह किसी माँ से जन्म नही लेता, कमल के फूल पर प्रकट होते है व उनकी परवरिश की लीला कंवारी गायों के दूध से होती है।  मात-पिता मेरे कुछ नाही, ना मेरे घर दासी। जुलहा का सुत आन कहाया, जगत करे मेरी हाँसी।। 5 वर्ष की अवस्था मे वह बड़े-बड़े विद्वानों के छक्के छुड़ा देते है।  और ज्ञान सब ज्ञानड़ी, कबीर ज्ञान सो ज्ञान । जैसे गोला तोप का करता चले मैदान।। परमात्मा कभी मरते नहीं उनका शरीर अजर अमर और अविनाशी तत्व से बना होता है। जो बूझे सोए बावरा, क्या है उमर हमारी। असंखो युग प्रलय गई, मैं तब का ब्रह्मचारी।। जिसने ये लीला की वह परमात्मा न मेरा जन्म न गर्भ बसेरा, बालक बन दिखलाया। काशी नगर जल कमल पर डेरा, वहाँ जुलाहे ने पाया।। और वह परमात्मा चारो युगों में आते है सतयुग में स...

कबीर जी का इतिहास

चित्र
            600 सौ वर्ष बाद वही इतिहास दोहराने की कोशिश 600 सौ वर्ष पहले भी जब कबीर परमेश्वर जी हमें निज धाम सतलोक ले जाने के लिये आये थे तो उस वक्त भी उनको बहुत संघर्ष करना पड़ा था पाखंडी पंडितो ओर मुल्ला काजियो ने कबीर परमात्मा का बहुत विरोध किया उन्हे झूठा बदनाम किया यहां तक की उन्हे खत्म करने के लिये सभी प्रयास किये तोप से उड़ाने की कोशिश, भूखे शेर के पिंजरे में डाला, हाथी से कुचलना चाहा तो कभी गंगा में डुबोना चाहा, उबलते गर्म तेल की कड़ाई में डाला लेकिन वो दुष्ट लोग अविनाशी कबीर परमात्मा का कुछ नही बिगाड़ पाये परमात्मा  चाहते तो क्षण भर में सबको सबक सिखा सकते थे लेकिन उन्होने ऐसा नही किया परमात्मा कहते है यह सब मेरी ही आत्माये है यह भटके हुऐ है कयोकी बच्चे जितने मर्जी बुरे हो जाये लेकिन मां बाप कभी गलत नही हो सकता ईसलिये परमात्मा उनके जैसा नही बन सकता बल्कि हमे सीधे मार्ग पर लाने लिये हर कष्ट को सहन किये लेकिन हम नीच लोग फिर भी परमात्मा को पहचान नही पाये ओर वो 120 वर्ष लीला करने के बाद मगहर से सशरीर वापिस सतलोक चले गये ओर हम आज तक ईस गंदे...

बीमारी का इलाज

चित्र
                हर बीमारी का आसान इलाज हम देखते आए हैं और हमारे साथ भी बीती है, कि यह बीमारी चाहे शारीरिक हो चाहे मानसिक, पर हर किसी व्यक्ति के शरीर में पाई जाती है। और हर कोई इंसान कोई न कोई बीमारी से पीड़ित रहता है। यह आज से नहीं जब से संसार की उत्पत्ति हुई है तब से ही लागू है, तो यह क्या भगवान का संविधान है? या हमारे कर्म है? अगर हम इस विषय पर गहरे चलते हैं तो पता लगता है कि यह हमारे पिछले पाप कर्म होते हैं जो हमें दुखदाई होते हैं। हमारा मनुष्य जन्म होते हुए भी हम भगवान का नाम नहीं जपते और शराब के ठेके, तंबाकू सेवन व अनेक प्रकार की बुराइयों में जुड़े रहते हैं जिसका परिणाम हमें भुगतना पड़ता है। तो क्यों ना हम अभी से ही कर्म बनाने शुरू कर दें तो कितनी अच्छी बात है। यजुर्वेद अ. 5 मन्त्र 32 में यह भी लिखा है की कबीर परमात्मा पाप कर्म काट सकते हैं जो व्यक्ति तत्वदर्शी संत से नाम लेकर भक्ति करता है तो क्यो ना उस भगवान की शरण मे ही जाए क्यो बुजुर्गों के अंधविश्वास में अड़े रहे? अगर उनके पीछे चले तो वो पूरी जिंदगी दुख पाए और हम भी उसी के...

कोरोना का कहर से मुक्ति

चित्र
                    कोरोना से निजात पाना    आज हमारे देश भारत मे एक विकराल परिस्थिति है वो है कोविद-19   इससे बचने या छुटकारा पाना मुश्किल का काम है लेकिन आसान भी है। पर इस महामारी ने पूरे विश्व में अपनी जगह बना ली है और पूरा विश्व इस संकट की घड़ी में अब सभी वैज्ञानिकों ने भी हाथ खड़े कर दिए है कि इसका इलाज संभव नहीं है। पर जब मनुष्य संसार मे कोई साथी या सहारा नही मिलता है तो केवल भगवान को ही याद करता है। जब भगवान  को याद किया जाता है तो उसके बाद बाकी कुछ नहीं रहता है ।

हमारे शास्त्र और सतभक्ति

चित्र
👉  हमारे शास्त्र और सतभक्ति  👈 हमारे शास्त्र और सतभक्ति से ही लोगों के हर प्रकार के शारीरिक, मानसिक, दैहिक और आत्मिक रोग और कष्ट दूर हो रहे हैं और होंगे।  और हमारे शास्त्र और सतभक्ति से ही लाभ प्राप्त होंगे। पूर्ण सतगुरु सभी धर्मों के हमारे शास्त्र और सतभक्ति करवाते हैं। जबकि अन्य नकली धर्म गुरु लोकवेद के सहारे, हमारे शास्त्र और सतभक्ति का नाम लेकर सर्व मनुष्य समाज को नरक की तरफ ढकेल रहे हैं। हमारे सभी धर्मों हिंदू मुस्लिम सिख इसाई इत्यादि के  शास्त्रों के संकेतों की ओर चलना होगा । तो हमारे शास्त्र कहते हैं कि पापी प्राणी के भगवान पाप कर्म काट देेते हैं। अब रही बात कि वह परमात्मा, भगवान और प्रभु कौन हैं ? पूर्ण परमात्मा की भक्ति देने वाला सतगुरु प्रत्येक युग मे एक ही आते है, और वह तत्वज्ञान का प्रचार करते है । तो जानते है शास्त्रो में पूर्ण संत की पहचान अब सर्व समाज स्वयं तत्वज्ञान शिक्षित होकर और निर्णय करेगा की सर्वहित हमारे शास्त्र और सतभक्ति करने से ही होगा। और इस विषय पर भी जान ले कि वह वह भगवान कौन है और पूर्ण गुरु भी ...